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इस जुगाडू तकनीक को जान आप भी रह जाओगे हैरान लाखो की कमाई करवा रही है ये जुगाडू तकनिकी - Download This Video



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इस जुगाडू तकनीक को जान आप भी रह जाओगे हैरान लाखो की कमाई करवा रही है ये जुगाडू तकनिकी जैसा की हम सब जानते है की जब प्याज मार्किट में ज्यादा होते है तो इसी प्याज के भाव 2 से 3 रूपए तक आ जाते है और जब मार्किट में नहीं होता तो यही प्याज 60 रूपए तक भी आ जाता है कभी आपने सोचा की अगर ये प्याज मार्किट में नहीं होता तो कहा होता है तो आपको बता दें की भारत में ऐसे जुगाडू आदमी है जो ऐसी टेक्नोलोजी से सालो तक प्याज को सही सलामत रख सकते है और इस आदमी के बारे में जिसके बारे में हम बता रहे है वो आदमी तो जुगाडुओ का बाप है क्योकि इसके इस जुगाड़ से हजरों लोगो ने बहुत पैसो की कामाई की है देखे | ये कहानी है एक ऐसे इन्सान की जो प्याज की खेती करता था पर प्याज को सही से सुरक्षित नहीं रख पाता था जिसकी वजह से उसे मुनाफा बहुत कम होता था , पर उसी किसान ने ऐसा कारनामा किया की उसके जैसे हजारों किसान भी आज 3 गुणा मुनाफा कमा रहे है आखिर ऐसा क्या कारनामा की जिससे उनका मुनाफा ट्रिपल हो गया। जब अन्य न्यूज़ वालों ने रवि से पूछा तो उनकी ये जुगाडू तकनीक के बारे में सुन सब दंग रह गए ये जुगाडू तकनीक वाकई में बहुत ही अच्छी और गजब थी , रवि कहते है की मेने इस तकनीक में बहुत कम पैसा इन्वेस्ट किया है पर इस तकनीक से प्याज बहुत कम सड़ते है और हम इस तकनीक से सालो तक प्याज सुरक्षित कर सकते है तो पढ़िए ये कौनसी तकनीक है। रवि बंद कमरे में लोहे की जाली को जमीन से 8 इंच ऊंचा बिछाते हैं। ऐसा करने के लिए कुछ-कुछ दूरी पर दो-दो ईंटें रखते हैं। उसके ऊपर प्याज का स्टोरेज करते हैं। लगभग 100 स्क्वेयर फीट की दूरी पर एक बिना पैंदे की कोठी रखते हैं। ड्रम के ऊपरी हिस्से में एक्जॉस्ट पंखे लगा देते हैं। पंखे की हवा जाली के नीचे से प्याजों के निचले हिस्से से उठ कर ऊपर तक आती है। इससे पूरे प्याजों में ठंडक रहती है। दोपहर में हवा गर्म होती है, इसलिए दिन की बजाय रातभर पंखे चलाते हैं। पटेल ने इस तकनीक से 1000 क्विंटल प्याज का भंडारण किया है। 2000 क्विंटल और खेतों में हैं, जो इसी तरह भंडारण करने वाले हैं। पिछले साल उन्होंने बारिश बाद 200 क्विंटल प्याज 35 रु. किलो के भाव बेचे थे। पटेल ने बताया इस तकनीक से 80 प्रतिशत तक सड़न नियंत्रित होती है। पहले जहां 10 प्याज खराब होते थे, तो अब 2 होते हैं। वजह यह है कि किसी प्याज में सड़न लगती थी, तो आसपास के प्याज खराब कर देता था। अब कोई प्याज सड़ता है तो पंखे की हवा से वहीं सूख जाता है। क्या कहते हैं रवि पटेल पटेल बताते हैं प्याज की फसल अमूमन मार्च-अप्रैल में निकलती है। इस समय आवक अधिक होने से प्याज का मंडी भाव 2 से 3 रुपये किलाे तक पहुंच जाता है। बारिश के बाद यही भाव 30 से 35 रुपये किलो न्यूनतम होता है लेकिन प्याज गर्मी से जल्दी खराब होने के कारण इसका स्टोरेज किसान के लिए चुनौती होता है। किसान जहां भंडारण करते हैं, वहां पंखे-कूलर की व्यवस्था करते हैं लेकिन ढेर में प्याज एक दूसरे की गर्मी से ही खराब हो जाते हैं। इसलिए मैंने ऐसी तकनीक लगाई है कि हर प्याज को जमीन से ही ठंडक मिले। कोई प्याज खराब भी हो तो ढेर में मौजूद आसपास के प्याज खराब नहीं हो।

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